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झाबुआ

इंदौर यातायात पुलिस द्वारा चालानी कारवाई में मध्यमवर्गीय परिवार और विधार्थीयो को टारगेट किया जा रहा है

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इंदौर – इंदौर में यातायात पुलिस द्वारा चालानी कार्रवाई को लेकर मध्यमवर्गीय परिवार और विधार्थीयो में नाराज़गी बढ़ती नजर आ रही है। लोगों का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई का मुख्य निशाना मध्यमवर्गीय परिवार और कॉलेज विद्यार्थियों को बनाया जा रहा है। जिन इलाकों में चेकिंग की जाती है, वहां अधिकतर दोपहिया वाहन चालकों को रोका जाता है। कई विद्यार्थीयों ने यह भी आरोप लगा रहे हैं कि पुलिस से बहस करने पर चालान की राशि बढ़ाने या वाहन जब्त करने की चेतावनी दी जाती है ।


शहर के आम नागरिकों का कहना है कि नियमों का पालन सभी के लिए अनिवार्य है, लेकिन कार्रवाई का दायरा असमान रूप से सीमित रहने से सवाल उठ रहे हैं। वहीं वाहन चालकों का तर्क है कि बड़ी गाड़ियों, महंगे स्पोर्ट्स वाहनों और राजनीतिक/प्रशासनिक प्रभाव वाले व्यक्तियों पर कार्रवाई का अनुपात बेहद कम दिखाई देता है, जबकि साधारण नौकरीपेशा और विद्यार्थियों पर सख्ती ज्यादा है। ऐसा ही नजारा मंगलवार को शहर के पलासीया चौराहे पर देखने को मिला । जहां यातायात पुलिस से आशीष शर्मा और अन्य यातायात पुलिस द्वारा विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों को लेकर कारवाई की जा रही थी जिसमें विशेष रूप से गरीब , कालेज विधार्थियों और मध्यमवर्गीय परिवारों को रोका जा रहा था और समझाइश के बजाय चालानी कार्रवाई के लिए टारगेट किया जा रहा था । आशीष शर्मा और अन्य यातायात पुलिस द्वारा आमजनों की कोई सुनवाई नहीं की जा रही थी और सिर्फ चालानी कारवाई की जा रही थी और चालानी राशि न भरने पर वाहन जप्त की बात कही जा रही थी इस तरह से विधार्थियों को कारवाई के नाम पर भयभीत किया जा रहा था । हा यह जरूर यातायात नियमों का पालन करना आम नागरिक का कर्तव्य है लेकिन इन नियमों की आड़ में आमजन को समझाइश के बजाय चालानी कार्रवाई के नाम पर टारगेट करना कहा तक उचित है । यह भी है कि यातायात पुलिस द्वारा जन-जागरूकता के नाम पर सैकड़ों हेलमेट भी वितरित किए गये होंगे और कागज़ी खानापूर्ति भी पूर्ण की होगी । वही आमजन और विधार्थियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि यातायात पुलिस द्वारा जूनी इंदौर,गाड़ी अडा या टांसपोर्ट क्षेत्र , सियागंज आदि अनेक क्षेत्रों में कितने ओवरलोड वाहनों पर कारवाई की है कितनी बसों में क्षमता से अधिक सवारी बैठाने पर कारवाई की है या शहर में कितने मालवाहक के ड्राइवर , बीमा , फिटनेस को लेकर जांच और चालानी कारवाई की । लेकिन यातायात पुलिस अपना टारगेट पूर्ण करने के लिए विशेष रूप से विधार्थियों को टारगेट कर रही है । आमजन का यह भी कहना कि शासन स्तर से कोई भी यातायात नियमों को लेकर अभियान आए , यातायात पुलिस चोराहों पर खड़े होकर गरीब , मध्यमवर्गीय परिवार और विधार्थीयो को टारगेट करती है ।
इस मुद्दे पर अभिभावकों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि छात्र पहले ही किराया, कॉलेज फीस और अन्य खर्चों का दबाव झेल रहे हैं, ऐसे में भारी चालान आर्थिक बोझ बन रहा है। शहर में पिछले महीनों में हेलमेट, ट्रिपल राइड, डॉक्यूमेंट चेक जैसे मामलों में चालान की संख्या बढ़ी होगी है । फिलहाल, नागरिकों की मांग है कि चालानी कार्रवाई पारदर्शी एवं समान रूप से हो, साथ ही जागरूकता अभियान और चेतावनी प्रणाली को भी बढ़ाया जाए , ताकि यातायात सुधार का मूल उद्देश्य पूरा हो सके न कि केवल जुर्माना वसूली का भाव प्रतीत हो।

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