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झाबुआ

सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें बिना आवेदक की संतुष्टि के बंद होने का आरोप

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झाबुआ। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतों का प्रभावी एवं संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित करना है, लेकिन जिले में शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। एक आवेदक ने आरोप लगाया है कि उसकी शिकायत बिना संतोषजनक समाधान और बिना उसकी सहमति के बंद कर दी गई ।दो बार प्रधानमंत्री कार्यालय पर लिखित शिकायत को सीएम हेल्पलाइन पर बिना संतुष्टि के बंद कर दिया गया ।


जानकारी के अनुसार, आवेदक ने जल संसाधन विभाग द्वारा रामा विकासखंड के ग्राम भैंसाकराय में निर्मित बैराज के कथित गुणवत्ताविहीन निर्माण की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय को फोटो सहित स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजी थी। इस शिकायत का क्रमांक PMOPG/D/2026/0124498 बताया गया है। बाद में यह शिकायत संभवतः मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज हो गई।
आवेदक का कहना है कि शिकायत दर्ज होने के बाद मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से सत्यापन के लिए कई बार कॉल आए। इस दौरान उसने विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बैराज निर्माण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी। बाद में दोबारा कॉल आने पर भी उसने स्पष्ट रूप से असंतुष्टि दर्ज कराई।
आरोप है कि इसके बावजूद कुछ दिनों बाद पुनः कॉल कर बताया गया कि संबंधित विभाग द्वारा शिकायत का निराकरण कर दिया गया है। इस पर भी आवेदक ने अपनी असंतुष्टि व्यक्त की। इसके बाद उसे एक एसएमएस प्राप्त हुआ, जिसमें शिकायत के निस्तारण की सूचना दी गई, जबकि उसके अनुसार उसे यह नहीं बताया गया कि शिकायत का निराकरण किस आधार पर किया गया। आवेदक का आरोप है कि उसकी शिकायत बिना संतोषजनक समाधान के बंद कर दी गई। उसने यह भी दावा किया कि पूर्व में इसी मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय में दर्ज शिकायत का भी इसी प्रकार निस्तारण दिखाकर समापन कर दिया गया था । इस तरह प्रधानमंत्री कार्यालय पर भेजी जा रही शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है और सीएम हेल्पलाइन पर सिर्फ विभागीय जवाब को निस्तारण का रूप दिया जा रहा है । इसी तरह यदि शिकायतों को बिना जांच व आधार के बंद कर दिया जायेगा तो इसकी विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह है ।
आवेदक ने बताया कि जल संसाधन विभाग द्वारा भैंसाकराय में गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य की शिकायत पर भी कोई जांच न होने से विभागीय अधिकारियों की लापरवाह कार्य शैली में कोई बदलाव नहीं आया और फिर विभाग द्वारा ग्राम खरडूछोटी में भी निर्मित बैराज में भी निर्माण के कुछ समय बाद कई स्थानों पर दरारें आने का मामला सामने आया  । इस प्रकार यदि समय रहते प्रथम शिकायत पर जांच प्रारंभ होती और सख्त दिशा निर्देश शिकायत के आधार पर दिए जाते तो संभवतः खरडूछोटी में बनाए बैराज में दरारें नजर नहीं आती । लेकिन जांच के नाम पर लिपापोती ही मूल कारण है   जिससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं । यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही हैं, तो यह मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायत निस्तारण प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन सकता है ।

वही यदि शिकायतकर्ता दोबारा आपत्ति दर्ज भी कराता है, तो कई मामलों में उसे अपेक्षित सुनवाई नहीं मिलती। इससे लोगों का सीएम हेल्पलाइन जैसी महत्वपूर्ण जन-शिकायत प्रणाली पर विश्वास कमजोर होता है । आवश्यकता इस बात की है कि सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच हो, शिकायतकर्ता से अनिवार्य रूप से संपर्क किया जाए और उसकी संतुष्टि के बाद ही शिकायत का निराकरण किया जाए। इससे जनविश्वास मजबूत होगा और हेल्पलाइन अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा कर सकेगी।

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