बी.टेक. के बाद नौकरी से स्वरोजगार तक का सफर, निजी भूमि पर तालाब बनाकर प्रतिवर्ष करीब 2.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर रहे हैं
धार, 5 अक्टूबर 2026। सही अवसर की पहचान, योजनाओं की जानकारी और मेहनत के साथ आगे बढ़ने का जज्बा किसी भी व्यक्ति के जीवन में बदलाव ला सकता है। धार जिले के विकासखंड उमरबन अंतर्गत ग्राम करोदियामोटा निवासी श्री दद्दू पिता श्री शोभाराम की सफलता इसी का प्रेरक उदाहरण है। बी.टेक. की शिक्षा प्राप्त करने के बाद पावर हाउस में नौकरी करने वाले श्री दद्दू ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की जानकारी मिलने पर मत्स्य पालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाने का निर्णय लिया। आज वे अपनी निजी भूमि पर तालाब बनाकर पंगेशियस मछली पालन कर रहे हैं और इससे लगभग 2.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर रहे हैं।
समाचार पत्र में मिली योजना की जानकारी बनी बदलाव की शुरुआत
ग्राम करोदियामोटा के श्री दद्दू ने बी.टेक. की डिग्री प्राप्त करने के बाद पावर हाउस में नौकरी की। नौकरी के साथ उनके मन में स्वयं का स्वरोजगार स्थापित करने की इच्छा थी। इसी दौरान स्थानीय समाचार पत्र के माध्यम से उन्हें भारत सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की जानकारी मिली।
योजना के बारे में जानने के बाद उन्होंने इसे अपनी निजी भूमि का बेहतर उपयोग कर आय का नया स्रोत विकसित करने के अवसर के रूप में देखा। उन्होंने मत्स्य पालन विभाग, जिला धार से संपर्क किया और योजना के प्रावधानों, पात्रता, प्रक्रिया तथा तकनीकी पहलुओं की जानकारी प्राप्त कर आवेदन प्रस्तुत किया। विभागीय मार्गदर्शन के बाद उन्होंने मत्स्य पालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाने का निर्णय लिया।
निजी भूमि पर बनाया आधा हेक्टेयर का तालाब
योजना के अंतर्गत श्री दद्दू ने अपनी निजी भूमि पर 0.50 हेक्टेयर क्षेत्र में नवीन तालाब का निर्माण कराया। तालाब निर्माण एवं मत्स्य पालन गतिविधि की कुल इकाई लागत 5.50 लाख रुपये निर्धारित थी। योजना के प्रावधानों के अनुसार उन्हें मार्च 2023 में 3.30 लाख रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हुई।
योजना से मिली आर्थिक सहायता ने मत्स्य पालन की शुरुआत के लिए उन्हें मजबूत आधार दिया। उन्होंने अपनी निजी भूमि और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए तालाब को मत्स्य उत्पादन के लिए तैयार किया और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया।
विभागीय मार्गदर्शन से शुरू किया पंगेशियस मछली पालन
मत्स्य पालन उनके लिए नया क्षेत्र था। इसलिए श्री दद्दू ने स्वयं जानकारी प्राप्त करने के साथ-साथ मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों से तकनीकी मार्गदर्शन लिया। विभागीय मार्गदर्शन के अनुसार उन्होंने तालाब में पंगेशियस मछली पालन प्रारंभ किया।
उन्होंने मछली बीज के संचयन, संतुलित मत्स्य आहार, आवश्यक दवाइयों तथा अन्य इनपुट्स की नियमित व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया। तालाब की देखरेख और मछलियों की वृद्धि के लिए आवश्यक प्रबंधन कार्य भी उन्होंने विभागीय सलाह के अनुसार किया।
5.50 टन उत्पादन से हुई 5.50 लाख रुपये की आय
लगातार मेहनत और उचित प्रबंधन का परिणाम पहली ही उत्पादन अवधि में सामने आया। श्री दद्दू ने लगभग 5.50 टन मछली का उत्पादन प्राप्त किया। उत्पादित मछलियों के विक्रय से उन्हें लगभग 5.50 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई।
उपलब्ध आय-व्यय विवरण के अनुसार मत्स्य पालन गतिविधि में आवश्यक खर्च के बाद उन्हें लगभग 2.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। इस प्रकार योजना के माध्यम से शुरू की गई गतिविधि उनके लिए लाभकारी स्वरोजगार का माध्यम बन गई।
एक समय नौकरी के माध्यम से आय अर्जित करने वाले श्री दद्दू ने अब अपनी निजी भूमि को आय के सशक्त माध्यम में परिवर्तित कर लिया है। तालाब उनके लिए केवल मत्स्य उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण का आधार बन गया है।
किसान क्रेडिट कार्ड से मिली आर्थिक मजबूती
मत्स्य पालन गतिविधि को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए कार्यशील पूंजी की आवश्यकता को देखते हुए श्री दद्दू को भारतीय स्टेट बैंक, शाखा धामनोद के माध्यम से 2 लाख रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड भी जारी किया गया है। इससे उन्हें मत्स्य पालन से संबंधित आवश्यकताओं के लिए वित्तीय सुविधा उपलब्ध हुई है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति व्यक्त किया आभार
अपनी सफलता से उत्साहित श्री दद्दू ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन द्वारा किसानों एवं युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए संचालित योजनाएं उनके जैसे हितग्राहियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रही हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से मिली अनुदान सहायता और विभागीय मार्गदर्शन से उन्हें अपनी निजी भूमि पर मत्स्य पालन शुरू करने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि योजना का लाभ मिलने से उनके लिए मत्स्य पालन को व्यवस्थित रूप से शुरू करना संभव हुआ और आज इससे उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए श्री दद्दू ने कहा कि सरकार की योजनाएं युवाओं और किसानों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।
अन्य किसानों और युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत
श्री दद्दू की सफलता बताती है कि शासन की योजनाओं की जानकारी लेकर उनका सही उपयोग किया जाए तो उपलब्ध संसाधनों को आय के नए स्रोत में बदला जा सकता है। उन्होंने अपनी निजी भूमि का उपयोग करते हुए मत्स्य पालन को स्वरोजगार में बदला और विभागीय मार्गदर्शन से इसे लाभकारी गतिविधि के रूप में विकसित किया।
उनकी सफलता जिले के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणादायी है। विशेष रूप से ऐसे युवा, जो अपने गांव में रहकर स्वरोजगार स्थापित करना चाहते हैं, वे मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी आय के वैकल्पिक एवं लाभकारी माध्यम के रूप में अपना सकते हैं।
श्री दद्दू की कहानी यह संदेश देती है कि सरकारी योजना का लाभ, सही मार्गदर्शन और स्वयं की मेहनत जब एक साथ जुड़ते हैं, तो आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार होती है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के सहयोग से शुरू हुई उनकी यह यात्रा आज आर्थिक सशक्तिकरण, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी बन चुकी है।