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झाबुआ

वन विभाग द्वारा कई सामग्री दुगूने दामों में खरीदी कर, शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया, जो जांच का विषय है

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झाबुआ – वन विभाग की मनमानी कार्यशैली और उच्च दामों में सामग्री खरीदी के किस्से आए दिन सुनने को मिल रहे हैं । इस विभाग द्वारा कई सामग्री तो दुगूने से अधिक दामों में सामग्री खरीदी कर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया और अपनी जेबें गर्म की गई । इस तरह की छोटी छोटी खरीदी को लेकर यदि लोकायुक्त जांच करें , तो बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है । चूंकि विभाग द्वारा इस तरह की खरीदी को लेकर निविदा प्रक्रिया को अपनाया नहीं जाता है ।

वन विभाग झाबुआ के किस्से धीरे-धीरे आम होते जा रहे हैं । विभाग द्वारा कई सामग्री फर्म विशेष से खरीदी कर , आर्थिक लाभ साधा गया है और शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है । जानकारी अनुसार वन विभाग द्वारा पेटलावद परिक्षेत्र में फर्म विशेष से लाखों की सामग्री दुगूने दामों में खरीदी की । वर्ष 2023 में इस परिक्षेत्राधिकारी द्वारा फर्म विशेष से 48 नंग जीपी बाल्टी रू 350 प्रतिनंग की दर से खरीदी की गई थी जबकि यह सामग्री जीपी बाल्टी आज भी बाजार में 175 – 200 रू प्रति नग की दर से उपलब्ध है । वही पीवीसी ड्रम 1250 रू प्रति नग की दर से खरीदी की थी जबकि यह बाजार में 900 -1000 रू प्रति नग की दर से उपलब्ध है वही विभाग द्वारा इसी फर्म से कलर पेंट्स 300 रू प्रति लीटर खरीदा था जबकि आज भी बाजार में यह पेंट्स  रु 200 प्रति लीटर की दर से उपलब्ध है । वही विभाग द्वारा बड़ा ताला रू 320 प्रति नग की दर से खरीदा था जबकि बाजार में ताला बडा आज भी रू 200 की दर से उपलब्ध है । वही विभाग द्वारा चूना 483 किलो रू 30 प्रति किलो की दर से खरीदा था जबकि बाजार में सामान्यतः रू 10 प्रति किलो की दर से उपलब्ध है । तीन गुना अधिक दर में यह खरीदा गया। इस छोटी सी सामग्री में ही करीब दस हजार का अंतर है । वही विभाग द्वारा टेप 30 मीटर 500 रु में खरीदा गया था, जबकि यह टेप बाजार में रू 200 में आसानी से उपलब्ध है । विभाग द्वारा फर्म विशेष से खरीदे गए बिलों में जीएसटी को लेकर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है । याने सामग्री पर जीएसटी किस दर से लगायीं है । इसके अलावा भी कई सामग्री बाजार भाव से अधिक दरों में खरीदी की गई थी । इन सभी बिलों की विशेषता यह है कि विभाग द्वारा कोई भी खरीदी एक कार्य दिवस में बीस हजार से अधिक नहीं की है । यह छोटे-छोटे बिल राशि दिखने में बहुत कम दिखाई देते हैं लेकिन पूरे वर्ष भर में इन‌ सभी बिलों की खरीदी को बाजार भाव से तुलनात्मक अध्ययन किया जाए तो एक बड़ा घोटाला उजागर होने की संभावना है । वही एक आरटीआई कार्यकर्ता ने इन सभी बिलों की खरीदी को और बाजार भाव में अंतर को लेकर लोकायुक्त को शिकायत की बात कही है ।‌ इस तरह सभी परीक्षेत्र के बिलों का अध्ययन किया जाए, तो बड़ा मामला उजागर हो सकता है । इस तरह वन विभाग द्वारा कई सामग्री दुगूने दामों में खरीद कर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है ।‌ क्या शासन प्रशासन इस ओर ध्यान देकर विभाग की इस मनमानी को लेकर कोई जांच करेगा या फिर यह विभाग यूं ही मनमानी करता रहेगा और शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाता रहेगा……?

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