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झाबुआ

सामाजिक महासंघ द्वारा निर्धन वर्ग के 800 बच्चों को करीब 8 हजार पतंगों और 800 डोरो का निःशुल्क किया गया वितरण

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जलेबी के पैकेट प्रदान किए गए, निर्धन बच्चों के चेहरों पर आई मुस्कान
झाबुआ। सामाजिक महासंघ द्वारा प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी मकर सक्रांति पर्व के उपलक्ष में 10 जनवरी, शनिवार शाम 6 बजे से निःशुल्क पतंग एवं डोरा वितरण कार्यक्रम स्थानीय लक्ष्मीनगर स्थित अंबा रिसोर्ट पर रखा गया। जिसमें शहर सहित आसपास के गांवों के करीब 800 निर्धन बच्चों को 8 हजार पतंगांे और 800 डोरो का वितरण कर उन्हें चेहरे पर खुशी लाई गई। इस दौरान बच्चों को मिठाई के रूप में जलेबी के पैकेट प्रदान किए गए।
प्रारंभ में सामाजिक महासंघ के वरिष्ठ राधेश्याम परमार ‘दादुभाई’ ने बच्चों को ज्ञानवर्धक जानकारी देने के साथ धार्मिक प्रश्नावली की, जिनका अधिकांश बच्चों ने सहीं उत्तर दिया। सामाजिक महासंघ जिलाध्यक्ष डॉ. नीरजसिंह राठौर ने उपस्थित बच्चों को मकर सक्रांति पर्व पर चायना-नायलॉन के धागों का उपयोग नहीं करने हेतु प्रेरित किया एवं सभी से हाथ खड़े करवाकर इसके लिए संकल्प भी दिलवाया। महासंघ जिलाध्यक्ष डॉ. राठौर ने आगे बताया कि सामाजिक महासंघ का यह भव्य पतंग एवं धागा वितरण का 5वां आयोजन है। साथ ही बताया कि अगले वर्ष से राष्ट्रवाद, धर्म जागरण एवं सनातन संस्कारों की पाठशाला अंबा पैलेस पर आयोजित की जाएगी। जिसमें प्रतिदिन 1 घंटा पाठशाला आयोजन के साथ बच्चों के लिए 5 दिन का विशेष मेला आयोजित होगा। जिसमें बच्चों के झूले एवं मनोरंजन के भरपूर साधन होंगे। आपने उपस्थित सभी बच्चों से भगवान श्रीराम, भारत माता एवं देश के महापुरूषों के जयघोष लगवाएं। सामाजिक महासंघ के विनोदकुमार जायसवाल ने उपस्थित बच्चों एवं उनके परिवारजनों को सामूहिक ध्यान एवं गायत्री महामंत्र का जाप करवाया। नवीन पाठक ने बच्चों को मौसम और ऋतु की जानकारी दी। साथ ही प्रतिदिन बच्चों को मंदिर जाने और सूर्य भगवान को जल अर्पण करने से होने वाले लाभों के बारे में बताया।
चायना-नायलॉन के धागों से मानव और पशु-पक्षियों को होता है नुकसान
वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. केके त्रिवेदी ने बच्चों के अभिभावकों से कहा कि वे बाल्याकाल से ही उनमें धर्म, अच्छी शिक्षा, ज्ञान और संस्कार प्रदान करे, तो वह बड़े बनकर देश के अच्छे नागरिक बनेंगे। साथ ही बताया कि आज अंर्तराष्ट्रीय हिन्दी दिवस है। हमारी मातृभाषा हिन्दी है और हमे दैनिक दिनचर्या में बोलने में हिन्दी भाषा का उपयोग करने के साथ साईन भी हिन्दी भाषा में करना चाहिए। इस दौरान सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के कक्षा 6वीं के छात्र करण ने बच्चों को चायना और नायलॉन के धागों के उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में बताते हुए स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने हेतु प्रेरित किया। आंगनवाड़ी में अध्ययन करने वाले नन्हें बालक उदय ने भी बताया कि चायना-नायलान के धागे मानव जीवन के लिए हानिकारक होने के साथ पशु-पक्षियों के लिए भी नुकसानदायक है, इसलिए कोई भी व्यक्ति इसका इस्तेमाल ना करे।
8 हजार पतंगों एवं 800 डोरो का हुआ वितरण
निःशुल्क पतंग एवं धागा वितरण कार्यक्रम में शहर सहित आसपास के ग्राम बाड़कुआं सहित अन्य गांवों में करीब 800 निर्धन बच्चों 8 हजार से अधिक पतंगों और 800 से अधिक डोरो का वितरण कर उन्हें चेहरे पर खुशी लाई गई। साथ ही बच्चों को मकर सक्रांति के उपलक्ष में मिठाई के रूप में जलेबी के पैकेट प्रदान किए गए। जिस पर बच्चों ने अत्यधिक प्रसन्नता व्यक्त की।
यह रहे उपस्थित
संपूर्ण कार्यक्रम में सामाजिक महासंघ के वरिष्ठ कोमलसिंह कुशवाह, मधुसुदन शर्मा, जितेन्द्र शाह, नाथुलाल पाटीदार, कमलेश पटेल, भेरूसिंह चौहान ‘तरंग’, प्रवीणकुमार सोनी, स्वदेशी जागरण मंच से दिलीप जोशी, अनिल पोरवाल ‘भूरूभाई’, मीडिया प्रभारी दौलत गोलानी, मोंटू राठौर, अब्दुल रहीम ‘अब्दु दादा’, मातृ शक्तियों में भारती राठौर, अनिता जाखड़, दीपाली चौहान, सावित्री बारिया सहित बड़ी संख्या में सामाजिक महासंघ के पदाधिकारी-सदस्य उपस्थित रहे।

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