गांजे की अवैध खेती पर वन विभाग की चुप्पी पर सवाल
पुलिस ने पकड़ी गांजे की खेती, वन विभाग के बीट प्रभारी क्या कर रहे थे?
कलमोडा में करीब 100 क्विंटल, छापरी में 80 किलो और हिम्मतगढ़ में 527 किलो गांजे के पौधे जब्त; निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
झाबुआ। जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। पारा क्षेत्र के ग्राम कलमोडा में करीब 100 क्विंटल, कालीदेवी क्षेत्र के ग्राम छापरी में करीब 80 किलोग्राम तथा पेटलावद थाना क्षेत्र अंतर्गत पुलिस चौकी सारंगी के ग्राम हिम्मतगढ़ में 527 किलोग्राम गांजे के पौधे जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन कार्रवाइयों ने जिले में अवैध गांजे की खेती पर निगरानी रखने वाले विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब पुलिस को मिली जानकारी, तो वन विभाग के मैदानी अमले को भनक क्यों नहीं लगी?
एक ओर पुलिस विभाग नशे के खिलाफ अभियान चलाकर अवैध गांजे की खेती का खुलासा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सवाल उठ रहा है कि संबंधित क्षेत्रों में वन विभाग का मैदानी अमला क्या कर रहा था? बीट प्रभारी की जिम्मेदारी केवल अपने क्षेत्र तक सीमित रहना नहीं, बल्कि विभागीय दायित्वों के अनुसार क्षेत्र की निगरानी करना और अवैध गतिविधियों की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना भी है।
यदि संबंधित क्षेत्र वन विभाग की निगरानी या अधिकार क्षेत्र में आते हैं, तो यह जांच का विषय है कि वहां अवैध खेती कितने समय से चल रही थी और नियमित निरीक्षण के दौरान इसकी जानकारी क्यों नहीं मिल पाई। आखिर पुलिस की कार्रवाई के बाद ही ऐसी गतिविधियां सामने आने की नौबत क्यों आई…..? क्या विभागीय स्तर पर नियमित गश्त और निगरानी की जा रही थी? इन सवालों के जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देने चाहिए।
नशे के खिलाफ पुलिस सक्रिय, वन विभाग की जवाबदेही कौन तय करेगा?
गांजे के पौधों की इतनी बड़ी मात्रा में जब्ती केवल नशे के अवैध कारोबार की गंभीरता ही नहीं दर्शाती, बल्कि संबंधित क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता भी बताती है। अवैध खेती रोकने के लिए पुलिस के साथ संबंधित विभागों का समन्वय जरूरी है। यदि वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इलाकों में ऐसी खेती हुई है, तो संबंधित बीट प्रभारी और मैदानी अमले की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
वरिष्ठ अधिकारी करें जांच, लापरवाही पर तय हो जिम्मेदारी
अब आवश्यकता है कि वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी संबंधित क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण, गश्त और निगरानी के रिकॉर्ड की जांच करें। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि अवैध गांजे की खेती की जानकारी विभाग को पहले से थी या नहीं। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन अवैध खेती को समय रहते रोकने के लिए संबंधित विभागों की जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। सवाल सीधा है—जब पुलिस अवैध गांजे की खेती का पता लगाकर कार्रवाई कर सकती है, तो संबंधित क्षेत्रों में निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाला मैदानी अमला समय रहते इसकी जानकारी क्यों नहीं जुटा पाया…..?