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झाबुआ

प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंचाने का भी नहीं निकला नतीजा, सीएम हेल्पलाइन पर पहुंचते ही हो गई बंद

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शिकायतकर्ता की असंतुष्टि के बावजूद तीन शिकायतें Force close
झाबुआ। सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता संबंधी अनियमितताओं को लेकर आम नागरिकों को न्याय और जवाबदेही की उम्मीद रहती है, लेकिन जब शिकायतें प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय और विभाग के मुख्य अभियंता तक पहुंचने के बाद भी निराकरण के बजाय सीएम हेल्पलाइन पर पहुंचकर बंद हो जाएं, तो शिकायत निवारण व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ऐसा ही मामला जल संसाधन विभाग के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सामने आया है। जल संसाधन विभाग द्वारा रामा ब्लाक के ग्राम भैंसाकराय में बनाए तालाब की कथित घटिया गुणवत्ता और अनियमितताओं को लेकर शिकायतकर्ता द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय एवं मुख्य अभियंता तक शिकायतें पहुंचाई गईं। लेकिन इन शिकायतों को सीएम हेल्पलाइन पर स्थानांतरित कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बिना ही शिकायतों को Force Close कर दिया गया।


सीएम हेल्पलाइन के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार शिकायत क्रमांक 36294783 दिनांक 11 जनवरी 2026, शिकायत क्रमांक 39401736 दिनांक 10 जुलाई 2026 और शिकायत क्रमांक 40220674 दिनांक 25 अगस्त 2026 को दर्ज शिकायतें Force Close की गई हैं । ऐसे में सवाल उठता है कि जब प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई गई शिकायतों का भी अंत सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत बंद होने के रूप में हो रहा है, तो फिर उच्च कार्यालयों में शिकायत भेजने का औचित्य क्या रह जाता है?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की वास्तविक जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के बजाय शिकायतों को बंद करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। यदि शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं है तो बिना स्वतंत्र तकनीकी जांच के शिकायत बंद करना आखिर किस प्रकार का शिकायत निवारण है?
अब सवाल यह है कि क्या सीएम हेल्पलाइन का उद्देश्य शिकायतों का वास्तविक निराकरण करना है या केवल शिकायतों को बंद कर आंकड़ों में निराकरण दर्शाना? जल संसाधन विभाग के निर्माण कार्य की गुणवत्ता और शिकायतों को Force Close किए जाने की पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है ।

वही आवेदक ने लोक सेवा प्रबंधन विभाग से इन शिकायत को लेकर आरटीआई के तहत् जानकारी लेने की बात कही तथा यह भी बताया इसके तहत किन किन अधिकारीयो ने शिकायत को बिना तकनीकी जांच के कैसे बंद किया और आवेदन को बिना पढ़े ही शिकायत बंद की है साथ ही यदि किसी तरह से सही जांच नहीं होती है तो न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जावेगी ।

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