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झाबुआ

पिटोल में ढाबों पर शराब का कथित अवैध कारोबार! किसके संरक्षण में चल रहा है खेल ……. पुलिस या आबकारी ?

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*गुजरात बॉर्डर से लगे हाईवे पर ढाबों में शराब बिक्री के आरोप, आबकारी और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल*

*देवास में शराब माफिया के ट्रक से कुचलकर थाना प्रभारी की मौत के बाद भी पिटोल में अवैध शराब कारोबार पर लगाम कब?*

झाबुआ —– मध्यप्रदेश और गुजरात की सीमा से सटे पिटोल क्षेत्र में इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे संचालित कुछ ढाबों पर कथित रूप से अवैध शराब की बिक्री का कारोबार फल-फूल रहा है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि हाईवे किनारे स्थित ढाबों पर शराब आसानी से उपलब्ध हो रही है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि हाईवे किनारे यदि खुलेआम शराब का विक्रय हो रहा है तो जिम्मेदार आबकारी विभाग और पुलिस विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं है? क्या संबंधित विभागों की निगरानी केवल कागजों तक सीमित है या फिर इस अवैध कारोबार को कहीं न कहीं मौन संरक्षण प्राप्त है? इन सवालों का जवाब अब प्रशासन को देना होगा।
देवास की घटना ने खोल दी शराब माफिया के दुस्साहस की तस्वीर
हाल ही में 2 नवंबर को देवास जिले के खातेगांव क्षेत्र में अवैध शराब तस्करी रोकने पहुंचे थाना प्रभारी दिलीप पुरी को शराब से भरे ट्रक ने कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। इस घटना में एक आरक्षक भी घायल हुआ। बताया गया कि ट्रक में 1,800 लीटर से अधिक अवैध शराब भरी हुई थी। पुलिस की प्रारंभिक जांच में शराब तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क और गुजरात तक शराब पहुंचाने की कड़ियां सामने आई हैं।
इस घटना ने पूरे प्रदेश में अवैध शराब कारोबार और शराब माफिया के बढ़ते दुस्साहस को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। जब शराब तस्करी रोकने के लिए कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का सवाल भी खड़ा होता है।
पिटोल में भी उठ रहे हैं ऐसे ही गंभीर सवाल
गुजरात सीमा से लगा पिटोल क्षेत्र शराब तस्करी के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां से राष्ट्रीय राजमार्ग के माध्यम से गुजरात की ओर लगातार वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में हाईवे किनारे ढाबों पर कथित शराब बिक्री की शिकायतों को सामान्य मामला मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
25 अक्टूबर 2026 को पिटोल चौकी और झाबुआ कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक पिकअप वाहन से 227 पेटी बीयर जब्त की थी। शराब और वाहन सहित करीब 19.46 लाख रुपये का माल जब्त किया गया था। यह कार्रवाई भी बताती है कि क्षेत्र में अवैध शराब परिवहन की समस्या कितनी गंभीर है।
आबकारी और पुलिस विभाग की जवाबदेही कौन तय करेगा?
सवाल यह है कि पिटोल क्षेत्र में हाईवे किनारे संचालित ढाबों की नियमित जांच क्यों नहीं होती? यदि ढाबों पर अवैध रूप से शराब बेची जा रही है तो अब तक कितने संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई की गई? क्या आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर प्रत्येक ढाबे की जांच की जाएगी?
स्थानीय स्तर पर विभागीय संरक्षण को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अवैध शराब कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।
प्रशासन से सीधे सवाल
पिटोल हाईवे किनारे संचालित ढाबों पर शराब बिक्री की शिकायतों की जांच कब होगी?
आबकारी विभाग द्वारा पिछले छह महीनों में कितने ढाबों की जांच की गई?
क्या पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम बनाकर कार्रवाई की जाएगी?
यदि अवैध शराब बिक्री की पुष्टि होती है तो संबंधित ढाबा संचालकों के साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी?
क्या पिटोल से गुजरात सीमा तक शराब तस्करी और अवैध बिक्री के नेटवर्क की जांच की जाएगी?
अब सवाल केवल अवैध शराब बिक्री का नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही का भी है। देवास की घटना ने चेतावनी दे दी है कि शराब माफिया के खिलाफ समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो इसके परिणाम कितने गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और जिला आबकारी अधिकारी को पिटोल क्षेत्र के हाईवे किनारे संचालित ढाबों की निष्पक्ष जांच करवाकर सच्चाई सामने लानी चाहिए।
देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करते हैं या पिटोल में कथित अवैध शराब कारोबार पर सवाल यूं ही उठते रहेंगे।

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प्रादेशिक जन समाचार स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा मंच है। यहां विभिन्न समाचार पत्रों/टीवी चैनलों में कार्यरत पत्रकार अपनी महत्वपूर्ण खबरें प्रकाशन हेतु प्रेषित करते हैं ।

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